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लिंग-निरपेक्षता

Posted On: 19 Aug, 2015 Others,social issues,कविता में

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१८ अगस्त २०१५ को मुलायम सिंह जी ने एक सभा के उपरांत एक बयान में कहा है की “किसी भी लड़की से ४ लोग मिलकर दुष्कर्म नहीं कर सकते हैं. दुष्कर्म कोई एक व्यक्ति ही करता है”.. मुलायम सिंह जी का ये अपना स्वयं का अनुभव हो सकता है जिसके आधार पर सामूहिक दुष्कर्म को वो नकार रहे है…मगर हमारा तो ऐसे बयान सुनकर खून खौल जाता है…गली देने का दिल करता है…मगर पवित्र कलम से गाली लिख देना मैं उचित नहीं समझता इसलिए अपनी कविता में मैंने अनुचित शब्दों से बचे रहने की कोसिस की है…आप सभी पाठकों से उम्मीद करता हूँ की अपनी प्रतिकिर्या से मुझे अवगत कराएं की कितना सही लिख पाया हूँ.!
………………………………………………………………………………………………………………………………………… पुनीत शर्मा!
सुंदरवन के जंगल में
कुछ सियार आये बैठे हैं
अपराधियों के अम्बेडकर
चौपाल लगाये बैठे हैं
नारी-दुष्कर्मो के शोधार्थी
बलात-सिद्धांत बनाये बैठे
ध्रतराष्ट्र सरकार के रहनुमा
नारी से खिलवाड़ मचाये बैठे हैं
सामूहिक दुष्कर्म नहीं संभव
मुलायम ये रट लगाए बैठे हैं.
अपने अनुभवों को नेता जी
बीच चौपाल बताये बैठे हैं
अपराधियों के अम्बेडकर! तुमने,
कैसा विधान बना डाला?
गुंडों की खातिर तुमने,
नारी का सम्मान जला डाला!
बच्चों की गलती कहकर
दुष्कर्मियों से सहानुभूति
दुष्कर्म करने के लिए
वाह! तुम्हारी गिनती
कैसे नेता हैं आप, मुलायम
समझ हमें नहीं आता है..
सत्ता की खातिर तुमको
गुंडों के तलुए चाटना भाता है.
तुम्हे ऐसी घटनाओ पर
क्यों आवेश नहीं?
तुम्हारी भावनाओ में
लिंग-निरपेक्षता का
क्यों समावेश नहीं?
…………………………………………. ©पुनीत शर्मा!

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