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क्यों विधान सभा को शमशान बनाये फिरते हो ?

Posted On: 12 May, 2015 Others,कविता में

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जब नेता शक्ति की धुन में

पक्षपात कर जाते हैं

वोट बैंक के चक्कर में

सौगातें बंट्वातें हैं

गुंडे बदमाशों के संग

मंच साझा कर जातें हैं

जात धर्म की मेजों पर जो

प्रदेश बांटकर खा जाते हैं

कैसे कैसे नेता हैं ये , जो

गली देने में नहीं शर्माते हैं

सबसे ज्यादा शर्मनाक है

दागी मंत्री बन जाते हैं

ऐसे मंत्री तो बस अपनी

जेब गरम कर जाते हैं

और मानवता तार तार कर

राष्ट्र चेतना जार जार कर

अपनी पीठ थपथपाते हैं .

क्यों युवा मुखिया होने का

अभिमान उठाये फिरते हो

यूपी विधान सभा को क्यों

शमशान बनाये फिरते हो

एक घमंडी के आगे क्यों

नतमस्तक हो जाते हो

क्यों मुखिया होकर भी तुम

चापलूस बन जाते हो ?

करतूतों से तुम नहीं लगते

किसी हिन्दुस्तानी के बेटे

चुल्लू भर पानी में डुब मरो

छोड़ो ये सपा की भेंटे.

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Namita Sharma के द्वारा
May 12, 2015

बहुत अच्छा …

Namita Sharma के द्वारा
May 12, 2015

very nice poem!!!!!!!!!!!

Namita Sharma के द्वारा
May 12, 2015

ver very nice poem……………………….!

Namita_Sharma के द्वारा
May 12, 2015

very very nice poem !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

Rajesh Kumar के द्वारा
May 12, 2015

बहुत ही शानदार भाई

Shiv के द्वारा
May 12, 2015

बहुत ही अच्छे

Gari Babu के द्वारा
May 12, 2015

अच्छी कोसिस ह

Manoj Kumar के द्वारा
May 12, 2015

Ohoooooo!!!!!!!!!

rameshagarwal के द्वारा
May 21, 2015

जय श्री राम  पुनीतजी बहुत अच्छी कविता इन बेशर्म राजनेताओ को कुछ भी समझ में नहीं आएगा.लोहिअजी और जय प्रकाशजी को भी नहीं बक्शा उनके नाम पर राजनीती कर उनको बदनाम कर रहे.बहुत ही अच्छा तीर मारा कोई गोली नहीं बनी जो इनको मार सके केवल जनता का वोट काफी है.आज़म खान के सामने नतमस्तक है.

advpuneet के द्वारा
May 21, 2015

जय श्री राम रमेश जी. बहुत बहुत आभार. आप लोगों का साथ रहा तो मैं आगे भी कोसिस जारी रखूँगा! धन्यवाद!


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